Nov 9, 2014

जब बड़े हो जाना तो पढ़ना




















मेरी थोड़ी सी बड़ी हथेली में एक थोड़ी सी छोटी हथेली को महसूस करने का जो सुख है वो ही फिलहाल ज़िन्दगी का सबसे बड़ा लालच है. तुम एक एक दिन करके बढ़ते हो और मैं एक एक दिन कर के घटती हूँ. सोचो तो.. मुझे ख़याल भी न रहा कि कब से मैंने अपनी ज़िन्दगी की गिनती उलटी गिननी शुरू कर दी, कब मैं एक एक दिन बढ़ने की बजाय, एक एक दिन घटने लगी. ये शायद तब से ही हुआ, जब साल 2007 में नवंबर महीने की एक नर्म शाम को तुम आ गए थे हमेशा साथ रहने के लिए. वो शाम भी ऐसी थी कि साल में एक बार ही आती है. आसमान रौशन हो जाता है पटाखों से, घर रौशन हो जाते हैं दीयों की जगमग से और तुमने उस दिन हमारे मन रौशन कर दिये थे. कुल दीपक नहीं एक अखंड दीपक हो तुम हम सबके जीवन में.

ये भी कैसा सच है कि हमें अपनी ज़िन्दगी से तब ज़्यादा प्यार होने लगता है जब कोई और ज़िन्दगी उससे जुड़ जाती है. शायद तब पहली बार ऐसा होता है कि अपनी लम्बी उम्र के लिए दुआएं मांगने का मन हो बैठता है. माँ-पापा एक नए सिरे से खुद का ख़याल रखने लगते हैं, बच्चे के आ जाने पर. पापा अचानक बाइक चलाते वक़्त स्पीड बढ़ाना बंद कर देते हैं. जब इतने से ही सुकून नहीं आता तो बाइक ही किसी और को दे देते हैं. एडवेंचर की जगह सेक्योरिटी आ जाती है, और बाइक से दूर दूर तक जाने वाले पापा को कार ही सेफ लगती है. मम्मी की लापरवाहियां भी कम होने लगती हैं, सोने जागने का एक सही वक़्त होने लगता है. अचानक से प्लानिंग में हमारा भरोसा बढ़ने लगता है. मम्मी-पापा को आदत होने लगती है कि उनके आसपास हमेशा जॉन्सन&जॉन्सन की खुशबू बिखरी रहे. वो भीनी-भीनी बेबी स्मैल अब ज़िन्दगी की ख़ुशबू बन जाती है. और तुम बेख़बर रहते हो इन सब बातों से, सिर्फ मुस्कुराते हुए. उस मुस्कराहट में हम दोनों तलाश लेते थे अपने अपने मन की बातें.

मुझे याद है एक बार जब मैंने तुम्हे समझाया था कि एक दिन सारे बच्चों के मम्मी-पापा को उन्हें छोड़कर जाना होता है, क्योंकि वो बूढ़े होते जाते हैं और बच्चे भी बड़े और समझदार होते जाते हैं. तब से तुम हमेशा यही कहते आये कि मुझे बड़ा नहीं होना मेरे बड़े होने से आपलोग बूढ़े हो जाओगे और फिर आपको यहाँ से कहीं चले जाना पड़ेगा. इस मासूमियत का भला कोई क्या जवाब दे सकता है.

प्यार और गुस्से के फ़र्क को समझने की तुम्हारी मासूमियत जब भी याद आती है तो एक बड़ी मुसकान फ़ैल जाती है होठों पर. कभी जब मैं एक हलकी सी चपत लगा देती तो पहले तुम पूछते थे कि आपने प्यार से मारा या गुस्से से. अगर मैं कह दूँ प्यार से तो मुस्कुरा कर वापस खेलने लग जाते थे और कह दूँ गुस्से से तो नाराज़ होकर रोना शुरू कर देते थे. तुम अब भी यही करते हो, मैं कुछ भी कहूँ तो मेरी आँखों में झाँककर ये खोजने की कोशिश करते हो, कि बात प्यार से कही है या गुस्से से. पर अब सीधे पूछते नहीं हो. कुछ और बड़े होकर तुम समझने लगोगे कि वो गुस्सा भी तो दरअसल प्यार ही है, ख़ालिस प्यार..


जिस दिन तुम आये थे, उस दिन से लेकर आज तक हर रोज़ तुम्हारा होना हमें ज़िन्दगी के नए एहसास से भर जाता है. इंतज़ार भी होता है कि तुम जल्दी से बड़े हो जाओ और तुम्हारे बड़े होने को लेकर एक अजीब सी असुरक्षा भी होती है.. कहीं ऐसा न हो कि तुम बड़े हो जाओ और फिर तुम्हारी ज़िन्दगी में मेरी ज़रूरतों के बहाने धीरे धीरे कम होने लगें, क्या सारे माँ-पापा ऐसे ही होते हैं, हम जो चाहते हैं, उसे खुद ही काटते हैं और जिसे काटते हैं फिर खुद ही उसे जोड़ते भी हैं. ऐसा सीधा सीधा सोचना और उलटी उलटी उम्मीदें पालना तो हर तरह के प्यार का हिस्सा होता है. जैसे हमारे बीच प्यार का सबसे ख़ूबसूरत पहलू ये यह है कि कुदरत ने ही हमारा साथ और पास होना तय करके भेजा है. जब कभी भी गोल चक्कर लगाते हुए तुम बेसबब चूम लेते हो माँ को तो बस उस पल ही ज़िन्दगी मुक़म्मल हो जाती है. तुम्हारी कच्ची उम्र के कच्चे तजुर्बे सुनना, बदमाशियों में साथ देना, शिकवे दूर करने के लिए दिन दिन भर बाज़ारों में घूमना और नन्हें से दिल की अलग अलग सरगम से भीग जाना, अगर ये सब न हुआ होता तो सच में ज़िन्दगी बड़ी बेसलीका जाती.


तुम्हारी हर सालगिरह पर मेरा मन वही अटक जाता है, जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था, मेरी अधखुली आँखों को तुम्हारी पूरी खुली आँखें ख़ूब निहार रहीं थीं. बेसाख्ता मेरे मुंह से निकल गयी थी ये बात कि ‘मम्मी इसके सर पर बाल ऐसे हैं जैसे बड़े बच्चों के होते हैं’ और फट मुझे डांट लगायी गयी थी कि तुम तो बच्चे को नज़र लगा दोगी. अब सोचती हूँ तो बेहद अजीब लगता था कि कुछ समय ऐसा भी था जब हमारे पास तुम्हें पुकारने के लिए कोई नाम न था. मुझे नहीं पता था कि तुम्हें किस नाम से पुकारूं. उस वक़्त तुम्हें कहाँ पता था कि ‘माँ’ क्या होती है, ठीक ठीक कहूँ तो मुझे भी नहीं पता था कि माँ होना क्या होता है. मैं अब भी हर रोज़ सीख रही हूँ तुमसे कुछ कुछ, ये लाग बात है कि ये सीखना, सिखाने के अभिनय तले होता है. 

मेरे पास-पास रहना, साथ-साथ रहना, नकली दांतों के इस्तेमाल से पहले, अभी बहुत कुछ सीखना है.. Happy Birthday Darling!! 



लम्बी उम्र, अच्छी सेहत, ढेर सारा प्यार, खूब सारी तरक्की जैसी सारी क्लीशे ब्लेसिंग्स :) 

लव लव लव.. मम्मा (मम्मा का ये यक़ीन है कि प्यार तीन बार कहने से ही मुक़म्मल होता है) 

11 comments :

  1. सब कुछ एक प्रार्थना सा ...जन्मदिन की शुभकामनाएं राघव

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    1. थैंक यू आश्युष भइया ;)

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  2. ये नोट सुरक्षित रख रहा हूँ भावना जी राघव को प्यार आपकी ममता को सलाम !

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    1. शुक्रिया अजीत जी.. :)

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  3. और जब इसे पढोगे तुम फिर से अपनी पत्नी के साथ तब वह और भी श्रद्धान्वित हो जाएगी कि राघव जी के निर्माण का कैसा अद्भुत क्षण रहा था यह :)

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  4. बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति है। लगा कि जैसे मेरे मन की ही आवाज़ है।

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    1. आरती.. हर माँ की बात है ये :)

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  5. आमीन .... आमीन .... आमीन .. :)

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    1. तुम भी तीन बार बोलोगे :D

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  6. when i m in Russia the pleasure of reading your post increases 10 times , when in India i hardly get time. This one is special post ,luv u Raghav & luv Raghav"s Mom . Keep writing

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