Jan 24, 2015

जिसकी हर बात नाज़ुकी की बात है


जैसे ओस की बूंदों में भरना 
रंग मनचीते
प्रेम भी ऐसी ही
नाज़ुकी की बात है.
***

जैसे भोर के आकाश में
उड़ती चिड़िया ने
छेड़ा हो कोई मधुर राग
प्रेम भी ऐसी ही नाज़ुकी की बात है.
***

जैसे वेणु में हवा 
फूंकती है चहक
प्रेम ने फूंका है
जीवन में जीवन
कि इसकी हर बात नाज़ुकी की बात है
***

जैसे फूटी हो एक
नई कोपल अभी
और हौले से झुक आया हो आकाश
उसके आलिंगन को
कि जब प्रेम हो तो हर बात
नाज़ुकी की बात है
***

नर्म हथेली पर आ बैठना
किसी तितली का
और छोड़ जाना रंग
अपनी याद के
प्रेम भी तो ऐसी ही
नाज़ुकी की बात है
***

रातरानी के फूलों से नारंगी
और पत्तियों से लेकर हरा
तुमने पूर दी चौक
मन के द्वार पर
अब हौले से आना भीतर
ये प्रेम की शुरुआत
बड़ी नाज़ुकी की बात है 
---


4 comments :

  1. बहुत अच्छी कविता , बट पहले से डिफरेंट

    ReplyDelete