बेटे ने मेरे सामने रख दिया अपना रंगों का डिब्बा
और मुझे कहा कि बना दूँ एक चिड़िया उसके लिए
मैंने सलेटी रंग में डूबाई अपनी कूची
और बनाने लगा लोहे की छड़ों वाली
एक चौकोर आकृति, जिस पर जड़ा था ताला
अचरज से फ़ैल गयी उसकी आँखें:
;... लेकिन ये तो जेल है, अब्बा
क्या आप नहीं जानते, कि कैसे बनाते हैं चिड़िया?’
और मैं उसे कहता हूँ: ‘बेटा, माफ़ कर दो मुझे.
मैं भूल गया हूँ चिड़ियों के आकार.’
मेरा बेटा मेरे सामने रख देता है अपनी कला की कापी
और मुझसे कहता है कि उसके लिए मैं बना दूँ गेंहूँ की बालियाँ
मैं पेन पकड़ता हूँ
और खींच देता हूँ एक बन्दूक का चित्र
वह हंस देता है मुझे नादान समझकर
और कहता है
‘अब्बा क्या आप नहीं जानते गेंहूँ की बालियों और बंदूकों के बीच फ़र्क?’
मैं कहता हूँ, ‘बेटा
एक वक़्त था जब मैं जानता था गेंहूँ की बालियों का आकार
रोटी और गुलाब के फूल की आकृति
लेकिन इस मुश्किल समय में
जंगल के दरख्त भी मिल गए हैं
सेना के आदमियों से
और थकावट से झुक गया है गुलाब का फूल
हथियारबंद गेहूं की बालियों व परिंदों
सशस्त्र संस्कृति व धर्म वाले इस समय में
तुम एक रोटी भी खरीदोगे तो उसके अन्दर बन्दूक रखी मिलेगी
गुलाब का एक फूल भी तोड़ोगे तो
उसके कांटे बढ़कर तुम्हारे चेहरे को खरोंच देंगे
किताब खरीदना चाहोगे तो
कोई ऐसी किताब न मिलेगी जिसे
थामने पर वह फट न पड़े
तुम्हारी अँगुलियों के बीच.’
मेरा बेटा बैठ जाता है मेरे बिस्तर के एक किनारे पर
और मुझे कहता है कि उसे सुनाऊं कोई कविता
मेरी आँखों से गिरता है एक आंसू तकिया पर
हैरानी से भरा वह
अपनी जीभ फेरता है और सोख लेता है
गिरी हुई बूँद
वो कहता है कि ‘अब्बा ये तो आंसू है न कि कविता!’
मैं उससे कहता हूँ कि
‘बेटा जब तुम बड़े हो जाओगे और
पढ़ोगे अरबी कविता का दीवान, तो जानोगे कि
शब्द और आंसू तो जुड़वाँ भाई हैं और यह भी कि अरबी मौसिक़ी कुछ नहीं है सिवा रोती उँगलियों से टपके आंसू के.’
शब्द और आंसू तो जुड़वाँ भाई हैं और यह भी कि अरबी मौसिक़ी कुछ नहीं है सिवा रोती उँगलियों से टपके आंसू के.’
मेरा बेटा रख देता है अपनी कलम और मोम रंगों का अपना डिब्बा मेरे सामने
और कहता है कि मैं उसके लिए बनाऊं
हमारे वतन का एक चित्र.
मेरे हाथ कांपते हैं उन रंगों को थामे
और मैं डूब जाता हूँ
आंसुओं की नदी में!

"शब्द और आंसू तो जुड़वाँ भाई हैं "
ReplyDeleteसच...
इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए तुम्हें ढ़ेरों बधाई...
आभार!
अद्भुत !
ReplyDeleteअनुवाद हमेशा की तरह अच्छा तो है ही अनुवाद के लिए कविता का चयन जादा महत्वपूर्ण है ,एक अच्छी कविता हाँ निज़ार कब्बानी के अलावा भी कुछ अन्य कवियों की रचनाये भी पढ़वाओ
ReplyDelete